Sunday, June 8, 2014

समस्या एवं समाधान

अभी मैं हाल ही में भारत से वापस लौटा हूँ। मेरी यात्रा का मुख्य उद्देश्य मेरी फिल्म “लोकतन्त्र की जय” पर कार्य करना था । साथ में मैं भारत में महिलाओं के साथ लगातार हो रहे दुर्व्यवहार के कारणों को अच्छी तरह से समझना चाहता था । फिल्म बनाने के दौरान मेरी कुछ सौ से ज्यादा लोगों--पुरुष, स्त्री मिलाकर--से बातचीत हुई । हर इंटरव्यू में मैंने  महिलाओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के बारे में चर्चा की एवम लोगों के विचारों को सुना । अब मैं वापस अमेरिका में आकर लोगों के ज़वाब फिल्म पर देख रहा हूँ ।


भारत से  हर दिन कम से एक ऐसी बुरी खबर आती है । भारतवासी जो भारत में हैं, उन्हें अवश्य ही दुःख  होता होगा । हम जैसे प्रवाशी भारतीयों के लिए यह और भी कष्ट का कारण है । हर दिन मुझे यह प्रश्न मिलता है, “आपके देश में औरतों की इतनी बुरी हालत क्यों है?” हमारे पास शर्मिंदगी महसूस करने के अलावा और कोई उपाय  नहीं होता है ।  


मैं इस लेख में  समस्या का विवरण कर रहा हूँ और समाधान भी प्रस्तुत कर रहा हूँ । मैं शिक्षा एवं व्यवसाय से इंजीनियर हूँ । यह जैसे हमारा धर्म है कि हम सिर्फ समस्या की बात नहीं करते,  हम समाधान भी ढूंढते हैं । मेरे समाधान में भारत के पढ़े लिखे लोग बड़ी भूमिका निभा सकते हैं । जो भी व्यक्ति इसे अपराध के खिलाफ है, वह रोकने में कुछ करने के लिए सक्षम है । मेरे समाधान में हर भारतीय  पुरुष और स्त्री का कुछ न कुछ उत्तरदायित्व है ।   


एक बात साफ़ थी: सारे स्त्री और पुरुष इसे समाज का अभिशाप कहते थे । महिलायें अपने भय के बारे बात करती थीं । एक माँ बता रही थी कि जब तक उनकी बेटी पढाई करके घर वापस  नहीं आती है, उनकी जान अटकी रहती है । स्त्री और पुरुष दोनो ही सरकार से सुरक्षा की मांग करते थे ।  


पुरुषों के उत्तर में दो बातें बार बार सामने आती थीं । पहला यह कि लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार गलत है, लेकिन इसमें  लड़कियों का भी कुछ दोष है । दोष के नाम पर वह लड़कियों के तंग कपड़ों की बात करते थे । या सिर्फ यही कि आजकल लड़कियाँ घर छोड़ कर बाहर घूमने लगीं हैं, अकेली कॉलेज जाती हैं, बाज़ार जाती हैं, इत्यादि  और अगर लड़कियां घर से निकलना बंद कर दें तो ऐसी घटनायें भी बंद हो जाएँगी । उनका दूसरा ख्याल था कि आजकल मोबाइल फ़ोन पर यौन सम्बन्धी फिल्म काफी आसानी से मिलने लगी हैं और इस वज़ह से पुरुषों में महिलाओं के तरफ आकर्षण बढ़ गया है और उससे यौन सम्बन्धी अपराध ज्यादा होने लगे हैं ।


मैं पहले भारत में महिलाओं के तंग कपड़ों के बारे में बात करता हूँ । मैं कुछ समय के लिए जर्मनी एवं ऑस्ट्रिया में रहा हूँ । मेरे पास गाड़ी नहीं थी और मैं हर शनिवार एवं इतवार को भी घर जाने के बजाय  ऑफिस में ही काम करता था । ऑफिस में मेरे कुछ मित्र बन गए थे । एक शनिवार को मुझे अकेले काम करते देख तरस खा कर मुझे एक झील के सैर करने ले गए ।  वहाँ पहुँच कर मुझे बड़ा सा झटका लगा क्योंकि बहुत सारे लोग--पुरुष एवं स्त्री--बिना कपड़ों के धूप में लेते हुए थे या झील में तैर रहे थे । यूरोप में धूप कम निकलती है एवं लोगों में विटामिन-डी की कमी से कई व्याधियां होती हैं । नाज़ी नेता हिटलर जर्मनी के लोगों को धूप में बिना कपड़ों के लेटने के लिए प्रोत्साहन देते थे । बिना कपड़ों के धुप में लेटने से विटामिन-डी मिलती है ।  एक बार जब मैं शुरू के झटके से उबरा, मुझे दूसरी नई बात यह दिखी कि किसी महिला से बदतमीज़ी होने की बात तो दूर कोई किसी को घूर भी नहीं रहा था ।


अगर हम  “महिलाओं के तंग कपड़ों” वाली  बात मानने लगें तो यूरोप के बिना कपड़ों वाली जगहों पर हमें  बलात्कार की महामारी की अपेक्षा करनी होगी । मैं कैलिफोर्निआ में रहता हूँ एवं यहाँ पर गर्मियों में पुरुषों एवं स्त्रियों के पहनावे में कोई अंतर नहीं दिखता है । लेकिन यहाँ पर भी महिलाओं के साथ दुर्व्यहार नहीं के बराबर है ।


जहाँ तक यौन संबधी फिल्मों के आसानी से मिलने का प्रश्न है, अमेरिका में इंटरनेट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल यौन सम्बंधित फिल्मों को देखने के लिए होता है । मनोवैज्ञानिकों की एकमत राय है की अश्लील फिल्म या तस्वीर देखने का  यौन सम्बन्धी हिंसा, जैसी कि भारत में दिखती है, में कोई सम्बन्ध नहीं है ।


तो फिर हमारे इस गौरवशाली भारत में जहाँ हम देवी का नाम उनके पति से पहले--सीताराम, राधाकृष्ण--लेते हैं, ऐसा प्रकोप क्यों है?


इसका उत्तर देते हुए मुझे काफी दुःख होता है क्योंकि मैं भी एक भारतीय हूँ । भारत में महिलाओं के साथ अत्याचार इस लिए होता है की हम भारत के लोगों में इंसानियत की कमी है । हम हर ऐसे व्यक्ति के साथ जो हमसे है कमजोर होता है, उसके साथ बुरा व्यव्हार करते हैं । महिलायें शारीरिक रूप से कमज़ोर होती हैं और इसका नतीज़ा है कि उनके साथ हिंसा होती है । इसका न तो तंग कपड़ों से कोई ताल्लुक है या अश्लील फिल्मों के मोबाइल फ़ोन पर उपलब्ध होने से । महिलाओं के साथ अत्याचार का सेक्स से कोई लेना देना नहीं है । यह हिंसा है और मानविक मूल्यों का अभाव है ।  


हमारी  मानवता की कमी सिर्फ महिलाओं के साथ बुरे सलूक में ही नहीं नज़र आती है । अगर आप अपने  लिबास से गरीब लगते हैं, हर सरकारी कर्मचारी आपके साथ गंदे तरीके से पेश आएगा । कनाडा में भारतीय मूल के व्यंगकार हैं रसेल पीटर्स । मैं उनका एक कार्यकर्म देख रहा था । वह कह रहे थे कि अमेरिका में अक्सर हवाई अड्डों पर  भारतीयों लोगों की  आंतकवादी की तरह जांच होती है । अमेरिका के पुलिस को वह समझा रहे थे कि भारतीयों में एवम बाँकी आतंकवादियों में बहुत बड़ा फर्क है । बांकी आतंकवादी अमेरिका से घृणा करते हैं एवं उसका नुकसान करना चाहते हैं। हम  भारतीय लोग एक दुसरे से घृणा करते हैं और एक दुसरे का नुकसान करना चाहते हैं । उन्हें किसी और देश के लोगों से कुछ परेशानी नहीं है ।  

इंसानियत की कमी का निदान कोई राजनीतिक पार्टी नहीं कर सकती है, नहि पुलिस हम भारतीयों को डरा धमका कर इंसानियत की इज्जत करना सीखा सकती है ।


जैसा कि मैंने पहले लिखा है: इस समस्या का समाधान संभव है । इसका  समाधान यह कि हम सभी अपने परिवार के सदस्यों से, अपने मित्रों से इसकी चर्चा करें और उन्हें समझायें । दुःख है कि हमारे समाज में यह शिक्षा हमें अपने बुज़ुर्गों से  नहीं मिलती है ।  महिलाओं के साथ अत्याचार की अज़ीब बात यह है कि मुझे एक भी आदमी ऐसा नहीं मिला जो अपनी बहन या बेटी के साथ बुरे बर्ताव की बात को सोचकर क्रोधित नहीं होता हो । लेकिन साथ में मैंने यह भी देखा कि लोगों को यह समझ नहीं आती है कि जो अन्य लड़कियों के साथ होता है, उसकी उनकी बहन के होने के साथ होने की  उतनी ही सम्भावना है । जब मैंने महिलाओं से यह प्रश्न किया कि क्या उन्होंने अपने बेटे या भाई से कभी ऐसा कहा कि किसी और लड़की के साथ गलत व्यव्हार नहीं करना चाहिए । मुझे ऐसा लगा कि किसी महिला को कभी भी अपने बेटे, पति, या भाई से इस सम्बन्ध में बात करने की जरूरत महसूस नहीं हुई है । जिस व्यक्ति में थोड़ी भी अक्ल हो, उसे समझ आएगी कि भारत में यौन सम्बन्धी अत्याचार इतने व्यापक तभी हैं क्योंकि ज्यादातर पुरुष या तो इसमें हिस्सा लेते हैं या इसे अनदेखा कर जाते हैं । अगर एक लड़की का भाई किसी और महिला  के साथ बदतमीज़ी करता है, घूम फिर कर उसी  दुष्कर्म का परिणाम उस लड़की को भुगतना पड़ता है ।  


महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार को रोकने के शुरआत स्वयम भारत की महिलाओं को करने होगी अपने ही बेटे, भाई, एवं पति से इस बारे में बात करके एवं उनसे निवेदन करके, उनसे वचन लेके । भारत के पुरुष लडकियों के तंग कपड़ों और मोबाइल पर अश्लील चित्रों के लेकर उलझे हुए हैं ।  


मेरे समाधान का दूसरा हिस्सा है, भारत के पढ़े लिखे लोगों की इसमें जिम्मेदारी । मुझे बहुत दुख होता है कि हर हादसे के बाद फेसबुक पर लोग दुःख प्रकट करते हैं, अपराधियों को फांसी की सजा देने के लिए हस्ताक्षर जमा करते हैं । लेकिन अपने आसपास के लोगों से, अपने भाइयों से, मित्रों से, सहकर्मियों से उनके उत्तरदायित्व की बात नहीं करते हैं । उनकी प्रतिकिर्या से ऐसा लगता है, लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले किसी और गृह से आएं हैं ।  सच्चाई तो यह कि ऐसे दानव हमारे बिलकुल करीब हैं हमारे भाई, बेटे, मित्रों के रूप में ।  हमें सिर्फ आँख से पट्टी उतरने की  जरुरत है । यह समस्या इतनी व्यापक है कि हर भारतीय को इस पर कारवाही करनी होगी ।  यह समाधान सरल है क्योंकि इसके लिए हमें कहीं दूर नहीं पड़ेगा; हमारा परिवार ही हमारी कर्म भूमि  है ।


मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप मेरा दायरा (http://meradaayara.com/)  का हिस्सा बन कर इस भारत को इस अभिशाप से मुक्ति दिलाएं ।